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अब सारा साल उगाए सूरजमुखी

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Submitted by toshi on शुक्र, 09/07/2018 - 03:44

अब सारा साल उगाए सूरजमुखी

भूमि व खेत की तैयारी इसकी खेती हलकी सी भारी मिट्टी में सफलता पूर्वक की जा सकती है, लेकिन मध्यम किस्म की भूमि अधिक उपयुक्त रहती है | मिटटी का पीएच मान 6.5 से 8.5 इसकी सफल पैदावार के लिए उपयोगी होता है | लवणीय, क्षारीय एव पानी से भरे रहने वाले खेत इसकी खेती के लिए अनपयुक्त रहते हैं|  खेत से जल निकास का प्रबंद होना आवश्श्यक है | पिछली फसल की कटाई के पश्चात् मिटी पलटने वाले हल से एक जुताई करें | बाद में अच्छे अंकुरण के लिए भूमि की दो से तीन बार जुताई करें, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए | इसके बाद पट्टा (सुहागा) लगाकर बुआई  के लिए  खेत तैयार करें | ध्यान रहे कि खेत में ढेले न रहें | 

बिजाई का समय 

सूरजमुखी  की फसल प्रकाश असंवेदी है , अत: इसे वर्ष में तीन बार बोया जा सकता है | खरीफ मौसम में अधिक उपज हेतु इसकी बिजाई जुलाई -अगस्त माह में करें , रबी में मध्य अक्टूबर से नवम्बर के प्रथम पखवाड़े तक व बसंत कालीन बुआई के लिए जनवरी से फरबरी अतं तक का समय अति उत्तम है  | 

नीराई -गुड़ाई 

बुआई के 15-20 दिन बाद खरपतवार निकले| इसी समय पौधों की छंटाई कर पौधे से पौधे की दूरी सिर्फ आवश्यकता अनुसार करें तथा खरपतवारों  को समय -समय पर नष्ट करें | रसायनों द्वारा खरपतवारों के नियन्त्रण हेतु एल्क्लोर 1.5 किलोग्राम प्रति हेक्टयर की दर से पानी में घोलकर बुआई के एक दिन बाद छिड़काव करें या 750 ग्राम फ़्लूकालॉरेन प्रति  हेक्टयर की दर से पानी में घोलकर बुआई के दिन पहले खेत में छिड़काव कर अच्छी तरह मिटटी में मिलाए | यदि अधिक बढ़ने वाली किस्म बोई जाती है तो फसल को गिरने से बचाने के लिए कलियां बनते समय पौधे पर मिट्टी चढ़ाए| 

सिचांई

फसल में फूल आने के समय सिचांई करना जरुरी होता है |  कुल सिचांईयों की संख्या फसल की बुआई पर निर्भर करती है | अच्छी पैदावार के लिए मिटटी की संरचना, बरसात तथा बिजाई के समय को ध्यान रखते हुए 2-6  सिचांईयों की आवश्यकता होती है | प्रथम  सिचांई बुआई के एक माह बाद व अन्य  सिचांईयां 20-25 दिन के अंतराल से आवश्यकता अनुसार करें, किन्तु  फूल आने के समय एक सिचांई  अवश्य करें | 

कटाई 

सिरे के पास जब वृंत मुड़कर पीला पड़ जाए तथा नीचे की पत्तियां गिरने लगें ,तब  फूलों को तने के पास से काट लेना चाहिए, बीज इस अवस्था में पूरी तरह काले पड़ जाते है| अत: इस समय कटाई करें |  इसके बाद 2-3 दिन धुप में सुखाने के बाद डंडे से कूटकर या फूलों  को आपस में रगड़कर बीज निकल लें | बीज को आपस में रगड़कर बीज़ निकल लें | बीज को नमी की मात्रा 9-10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए | यदि फसल एक साथ नहीं पकती है, तो कटाई दो बार करनी चाहिए |  

 

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