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सर्दियों में जैविक तरीके से उगाएँ सब्जियां

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Submitted by toshi on Fri, 09/14/2018 - 06:15

आज लोगों में पर्यावरण और सव्स्थ्य को लेकर जागरूकता काफी बढ़ गई है, जिससे जैविक खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है | आज लोग स्वाथ्य रहने के लिए ऑर्गेनिक फूड को जयादा पसंद कर रहे हैं | ठण्ड की सब्जियों को जैविक खेती द्वारा उगाया जा सकता है | यह बहुत आसान होता है और इसे छोटे-बड़े दोनों ही स्तर पर किया जा सकता है | आइए हम आपको बताते हैं कि आप जैविक रूप से कैसे ठंड की सब्जियों को ऊगा सकते हैं। ...............

सही फसल का चुनाव करें : विश्व के हर हिस्से में अलग-अलग ठंड पड़ती है | कुछ हिस्सों में जहाँ कड़ाके की ठंड पड़ती है, इसलिए जब भी ठंड की सब्जियों को जैविक रूप से उगाने के बारे में सोचें, तो पहले यह पता कर  लें कि आपके द्वारा चुनी गई सब्जियां उस हिस्से के तापमान में जीवित रहती है | उदहारण के लिए प्याज में ठण्ड सहने की अद्धभुत क्षमता होती है | 

रोटेशन पॉलसी को अपनाएं : जैविक खेती का एक अहम पहलु यह है कि आप फसल को बदल-बदल कर लगाएं | जब एक ही फसल को बार-बार लगाया जाता है, तो मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है | साथ ही फसल बदलने से बीमारी से नुकसान भी कम होता है | आपको हर सीजन में फसल बदल देनी चाहिए | 

सर्द हवाओं से बचाएं : ठंड की सब्जियों को सर्द हवाओं से बचाने की जरुरत होती है | इसके लिए आप हवा की दिशा में पेड़ पौधों का इस्तेमाल अवरोध के रूप में करें | आप चाहें तो इसके लिए झाड़ियों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं | साथ ही पौधों को इस तरह से लगएं, ताकि घर की दीवार सर्द हवाओं से बचाने के लिए होना चाहिए | ऐसा न हो कि सूरज की रोशनी में बाधा पहुंचने लगे | 

प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करें : जैविक खेती में प्राकृतिक खाद और कीनाशक का इस्तेमाल किया जाता है | इस तरह की खेती में रसायन कीटनाशक और खाद का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, जिससे न सिर्फ मिट्टी को नुकसान पहुँचता है, बल्कि इसकी उर्वरता  कम होती है | इसलिए जैविक खेती में हमेशा खाद के तौर पर पशुओं का बचा हुआ भोजन, पशुओं का मल और दूसरे पौधों के अपशिष्ट आदि का इस्तेमाल करना चाहिए | इस खादों का पर्यावरण पर बुरा असर नहीं पड़ता है और साथ ही पौधों के लिए ये काफी फायदेमंद होते है | 

मलीचिंक और कपोस्टिंग : जैविक खेती में मलिचिंग  और कपोस्टिंग का भी विशेष महत्व है | मलिचिंग में सब्जियां उगाने से पहले सड़ी-गली घास फूस की एक पतली परत बिछाई जाती है | यह माइक्रो ऑर्गनिज्म को बढ़ाता है, जो पौधों के विकास के लिए काफी फायदेमंद होता है | साथ ही यह ठण्ड के समय पौधों को गर्म भी रखता है | इसी तरह पौधों के विकास को बढ़ावा देने के लिए कम्पोस्ट का इस्तेमाल भी जैविक खेती का अहम हिस्सा है | कम्पोस्ट एक तरह की प्राकृतिक खाद है, जो पौधों के अपशिष्ट, पशुओं के मल और दुसरे जैविक चीज़ो से तैयार की जाती हैं | जैविक खद्य पदार्थ परम्परागत तरीके  उगाए गए खाद्य पदर्थो की तुलना में ज़्यादा पौष्टिक और स्वादिष्ट होते हैं | 

 

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