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बुजदिल और आशावादी - हो गया जिंदगी मुझे जो होना था

Yamu Bhardwaj
Submitted by yamu on शुक्र, 12/08/2017 - 02:47

बुज़दिल :-


हो गया जिंदगी मुझे जो होना था,
हर मोड़ पर मेरे तो, बस लिखा रोना था।

भूल के ये साडी दुनिया दारी ,

अब तो एक लम्बी नींद सोना था। 
 Kya krege jikr bhi, khoon ke aansu 
 pikr भी
 Rah gujr gyi, zindi bsr gyi
 Rote huy aaye or rote huye hi jana 
 Tha
हो गया जिंदगी मुझे जो होना था,
 Hr mode pr mere to, likha bss rona 
 tha 

आशावादी :-

लाख आये आंसू पलकों में। .. पर,

मैंने उफ़ तक न की ,

कांटे बिछे थे उस राह पर , जिसको ,

पाने कि , जुर्रत  थी मैंने की। 

बन न पायी मैं मोहरा उस क़ायनात के साजिश की ,


 PAkkr ke hausle ki doori udd chli
 main,
 chhune unchhayi uss gardish ki.
 kya paya mene vha , dekh kr m 
 hairan thi
 Na koi apna praya, sbki soch saaman
 thi
 phir jana khel sara mene, 

 the vo hi log vha , jinke hauslo main udaan thi

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